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Insurance क्या है, insurance (बीमा) के प्रकार व संक्षिप्त इतिहास।

insurance kya hai in hindi
Insurance Kya Hai in Hindi

Insurance क्या है↴ 

Insurance (बीमा) का व्यवसाय परिसंपत्तियों (assets) के आर्थिक (Economic) मूल्यों के संरक्षण से संबंधित है। हर Assets का एक मूल्य होता है। परिसंपत्ति (assets) मालिक के प्रयासों के माध्यम से बनायी गई होती है। Assets मालिक के लिए मूल्यवान होती है क्योंकि वह उससे कुछ लाभ मिलने की उम्मीद रखता है। यह उसकी कूछ जरूरतों को पूरा करता है। लाभ एक आय या किसी अन्य रूप में हो सकता है। एक कारखाने या एक कार के मामले में, उसके द्वारा उत्पन्न उत्पाद बेच दिया जाता है और आय उत्पन्न होती है। एक मोटर कार के मामले में, यह परिवहन में सुविधा प्रदान करता है।
यह अपेक्षित है कि हर परिसंपत्ति (assets) समय की एक निश्चित अवधि के बाद समाप्त होती हे, जिसके दौरान वह लाभ प्रदान करेगी। उसके बाद यह हो सकता है कि लाभ ना उपलब्ध हो। एक कारखाने में एक मशीन या एक कार या एक मोटरकार का एक जीवन-काल होता है। उनमें से कोई भी हमेशा के लिए नहीं है। मालिक इस बारे में अवगत होता है और वह अपने कार्यों का प्रबंधन इस प्रकार कर सकता है कि उस अवधि या जीवन-काल के अंत तक एक विकल्प उपलब्ध हो। इस प्रकार वह यह सुनिश्चित करता है कि लाभ वना रहे। हालांकि, परिसंपत्ति पहले ही समाप्त हो सकती हैं। एक दुर्घटना या कुछ अन्य दुर्भाग्यपूर्ण घटना इसे नष्ट या लाभ देने में अक्षम कर सकती है। उस मामले में, मालिक और वह लोग जो लाभ का आनंद ले रहे थे उस लाभ से वंचित हो जाऐंगे। हो सकता है कि नियोजित विकल्प तेयार ना हो। यह एक प्रतिकूल स्थिति है। बीमा ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रभाव को कम करने में मदद करने वाला एक तंत्र है। यदि हानि होती है तो यह संपत्ति के मालिक या लाभार्थी को एक निश्चित राशि के भुगतान का वादा करता है।

बीमा के प्रकार (Types of insurance):-

1. जीवन बीमा (Life insurance)

2. साधारण बीमा या गैर जीवन बीमा (Simple Insurance or Non-life Insurance) 


बीमा का संक्षिप्त इतिहास (Brief History of Insurance)↴

 बीमा किसी ना किसी रूप में 3000 बीसी से अस्तित्व में आया था। चीनी व्यापारी दुर्गम तीव्र नदी से यात्रा करते हुए अपनी वस्तुओं को विभिन्न पोतों में वितरित कर देते थे जिससे किसी एक पोतों के खो जाने से हुआ घाटा, आंशिक रूप से साझा हो अर्थात मालिक को पूरा नुकसान न उठाना पड़े।
तूफान में फंसे जहाजों के कप्तान वजन कम करने और संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ माल दूर फेंक दिया करते थे इस तरह के माल फेंकने को प्रक्षिप्त माल कहा जाता है। यूनानीयों ने अंतिम संस्कार और जिन सदस्यों की मृत्यु हो जाती थी, के परिजनों की देखभाल करने के लिए 7वीं शताब्दी ईस्वी के अंत में उदार समाज की शुरुआत की। इंग्लैंड के अनुकूल समाजों का गठन भी इसी प्रकार किया गया था। 1666 में लंदन में लगी भयानक आग से, जिसमें 13000 घरों से भी अधिक नष्ट हो गए थे। इस घटना ने बीमा को बढ़ावा दिया और पहली अग्नि बीमा कंपनी जिसे फायर ऑफिस (Fire office) कहा जाता है, को 1680 में शुरू किया गया था। वर्तमान में प्रचलित रूप में बीमा कारोबार का उद्गम, लंदन में लॉयड के कॉफी हाउस (Lloyd's Coffee House) से हुआ था। व्यापारी जो लंदन में Lloyd's Coffee House में इखट्टा होते थे, वह माल को ले जाते समय होने वाले नुकसान को साझा करने के लिए सहमत होते थे। गहरे समुद्र पर समुद्री डाकुओं द्वारा माल लूट जाने और खराब मौसम माल को बरबाद कर देता था या जहाज के डूब जाने की वजह से नुकसान होता था। एसी प्रतिकूल परिस्थितियों ने भी Insurance को बढावा दिया।

भारत में पहली बीमा कंपनी↴ 

भारत में बीमा एक अंग्रेजी कंपनी Oriental Life Insurance Company Limited द्वारा लाया गया था और 1818 में जीवन बीमा (Life-Insurance) के साथ शुरू हुआ। पहली भारतीय बीमा कंपनी 1870 में मुंबई में गठित बोम्बे मिचुअल इंश्योरेंस सोसाइटी लिमिटेड थी। उसके बाद दिल्ली में 1896 में कोऑपरेटिव कंपनी, मुंबई में 1897 में द अंपायर ऑफ इंडिया, चेन्नई में द यूनाइटेड इंडिया, कोलकाता में द नेशनल इंडिया और हिंदुस्तान कोऑपरेटिव स्थापित की गयी। 30 सितम्बर 2012 में 24 जीवन बीमा कंपनियां, 27 गैर जीवन बीमा कंपनियां और 1 जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया थी।

बीमा की आवश्यकता और उद्देश्य (Need and Purpose of Insurance):-

 संपत्ति बीमीय होती है क्योंकि वह आकस्मिक घटनाओं के कारण, संभावित रूप से उनके अपेक्षित जीवन काल से पहले नष्ट या अक्रियाशील हो सकती है। इस तरह की संभव घटनाएं जोखिम पेरिल कही जाती हैं। आग, बाढ़ विध्वंस बिजली, भूकंप आदि जोखिम है यदि इस तरह के जोखिम संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकते हैं। तब हम कहते हैं कि संपत्ति को वह जोखिम हो सकता है। जोखिम घटनाएं हैं, जो परिणामी हानि या नुकसान के रूप में मालिक को प्रभावित कर सकती है। एक इमारत के मालिक को भूकंप के खतरे के कारण इमारत की लागत उसमें रखी चीजों और जितना नुकसान हुआ है उसके अनुसार कुछ लाख रुपये या कुछ करोड़ रुपयों का हो सकता है।

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जोखिम इसका मतलब केवल यह है कि नुकसान या क्षति की संभावना है या क्षति हो सकती है। भूकंप आ सकता है लेकिन यह हो सकता है कि इमारत बिल्कुल भी प्रभावित ना हो। Insurance इस संभावना के विरुद्ध किया जाता है कि नुकसान हो सकता है जोखिम के बारे में एक निश्चितता होती है। शब्द संभावना का अर्थ अनिश्चितता है प्रासंगिक है यदि आवश्यकता होती है तो उसके विरुद्ध बीमा नहीं किया जा सकता है। एक मनुष्य के मामले में मृत्यु निश्चित है लेकिन मृत्यु का समय निश्चित है व्यक्ति का बीमा उसकी मृत्यु के समय की अनिश्चितता के कारण किया जाता है मरणासन्न रूप में बीमार एक व्यक्ति के मामले में मृत्यु का समय अनिश्चित नहीं होता है, बल्कि निश्चित रूप से पता नहीं होता है कि मृत्यु जल्द ही होने वाली हो तो उसका बिमा नहीं किया जा सकता है।
Insurance संपत्ति की रक्षा नहीं करता है। और न ही, जोखिम की वजह से होने वाली घटनाओं को कम करता है। बल्कि insurance केवल संपत्ति के मालिक और उस संपत्ति पर जो निर्भर करते हैं उन पर जोखिम के प्रभाव को कम करने की कोशिश करता है। यह वह सिस्टम है जो संपत्ति से लाभान्वित होते हैं और इसलिए जब संपत्ति क्षतिग्रस्त होती है तो उसमें घाटा होता है। बीमा केवल नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति और वह भी पूरी तरह से नहीं करता है। केवल आर्थिक परिणामों का बीमा किया जा सकता है यदि नुकसान गैर-आर्थिक (non-Economic) है तो बीमा संभव नहीं हो सकता। गैर-आर्थिक (non-Economic) नुकसान के उदाहरण:- माता पिता का प्यार और स्नेह, प्रबंधकों का नेतृत्व, परिवार की ऐसी वस्तुए जो उत्तराधिकारी को मिलती है से भावनात्मक लगाव आदि।

◾ एक नजर↴

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